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गूगल अर्थ को भारत का जवाब...'भुवन'

अगर गूगल अर्थ काम न करे तो तो विकल्प खोजने की ज़रूरत नहीं...क्योंकि अब गूगल अर्थ को भारत का जवाब...'भुवन'के रूप में मिल गया है। जी हां, गूगल अर्थ की तर्ज पर अब ISRO ने भुव लॉन्च कर दिया है। मिनिस्टर ऑफ स्टेट, पीएमओ पृथ्वीराज चव्हाण ने जीओपोर्टल भुवन(3D मैपिंग टूल) का बीटा वर्ज़न www.bhuvan.nrsc.gov.in लॉन्च कर दिया।

इसरो की तरफ से भुवन एक क्रांतिकारी मैपिंग एप्लिकेशन है। इसरो का दावा है कि भुवन गूगल अर्थ के मुकाबले कहीं बेहतर रेज़्यलुशन वाली इमेजेस सामने लाएगा।

भुवन नाम का वेब-बेस्ड टूल भारतीय उपमहाद्वीप के किसी भी हिस्से को बड़ी बेहतर ढंग से पेश करता है बशर्ते आप किसी मिलिट्री या न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन जैसे सेंसिटिव एरिया को न सर्च कर रहे हों। रेज़य्लुशन की डिग्री उस जगह की पॉपुलैरिटी पर निर्भर करेगी। इसरो के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि इंडियन टरेन के ज़्यादातर हिस्से कम 6 मीटर के रेज़्यलुशन से ढके हैं...जिनका स्पेशियल रेज़्यलुशन कम से कम 55 मीटर है।

क्या भुवन गूगल अर्थ से बेहतर है?
भुवन कम से कम एक साल पहले की इमेजेस का इस्तेमाल करेगा। ये इमेजेस इसरो के रिमोट-सेंसिंग सेटलाइट्स से खींची गई होंगी। रिमोट-सेंसिंग सेटलाइट सड़क पर खड़ी कार जैसे छोटे-छोटे ऑब्जेक्ट्स को भी कैप्चर कर सकता है। इसके इस्तेमाल से दुनिया का 3डी मैप भी बनाया जा सकता है।

उम्मीद की जा रही है कि भुवन की पिक्चर्स गूगल अर्थ के मुकाबले ज़्यादा शार्प होंगी क्योंकि भुवन के लिए 10 मीटर के रेज़्यलुशन वाली इमेजेस इस्तेमाल की जाएंगी। बाकी पोर्टल्स 200 मीटर रेज़्यलुशन फोटो ऑफर करते हैं।
मैपिंग कैसी होगी...
नया ISRO भुवन मल्टी-लेयर इन्फॉर्मेशन मैपिंग मुहैया करवाएगा जबकि गूगल अर्थ सिंगल लेयर इन्फॉर्मेशन मैपिंग मुहैया करवाता है।

इसके अलावा, भुवन मैप इन्फॉर्मेशन को सालाना अपडेट करेगा जबकि गूगल अर्थ 4 सालों के बाद मैप इन्फॉर्मेशन अपडेट करता है।
डाउनलोड नहीं कर पाएंगे...
भुवन यूज़र्स को एक बहुत बड़ी निराशा हो सकती है। गूगल अर्थ की तरह यूज़र्स भुवन से इमेजेस डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। कई साइट्स की तरह ही भुवन पर सिर्फ कंटेंट ब्राउसिंग हो पाएगी।

इसरो के चेयरमैन जी माधवन नायर का कहना है कि "भुवन के ज़रिए हम लोकल इन्फॉर्मेशन प्रोड्यूस कर पाएंगे जो हमारे ही देश से जुड़ी होगी। इन इन्फॉर्मेशन्स के ज़रिए स्थानीय परेशानियों जैसे बाढ़, सूखा, इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमंट, एजुकेशन जैसी तमाम परेशानियों पर नजर डाली जा सकती है और उनसे जुड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

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