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दस साल में तैयार होगा कृत्रिम दिमाग

लंदन। एक तंत्रिका विज्ञानी का दावा है कि अगले 10 वर्षों के भीतर वैज्ञानिकों को मानव मस्तिष्क का मॉडल विकसित करने में सफलता मिल सकती है। यह कृत्रिम दिमाग असली दिमाग की तरह काम करेगा।

स्विट्जरलैंड के ‘ब्रेन माइंड इंस्टीट्यूट’ में प्रोफेसर हेनरी मार्करैम ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं पूरी तरह यह मानता हूं कि ऐसा तकनीकी और जैविक रूप से सम्भव है। ऐसी ईजाद के लिए भारी संसाधन की जरूरत पड़ सकती है। वित्तीय संसाधन की कमी इसमें आड़े आ सकती है। यह बेहद खर्चीली परियोजना साबित होगी।”

आगे उन्होंने कहा कि इंसान के दिमाग की प्रतिकृति तैयार करना वाकई बेहद जटिल काम है, क्योंकि दिमाग करोड़ों तंतुओं, लाखों नसों, लाखों प्रोटीन, हजारों जीन आदि से बना होता है। इतनी सूक्ष्मताओं का सार समझते हुए दिमाग की रचना करना बेहद जटिल तो है, पर असम्भव नहीं।

उन्होंने कहा कि कभी हम रोबोट की परिकल्पना को काल्पनिक मानते थे, पर आज रोबोट इंसान से हजारों गुना ज्यादा सक्रियता के साथ बारीक से बारीक कार्यों को अंजाम देते हैं। उनका मानना है कि कृत्रिम दिमाग के विकास में दुनिया भर में पिछले सौ वर्षों में हुए अनगिनत शोध के निष्कर्षों को एक जगह इकट्ठा कर दिमागी संक्रियाओं को समझना बहुत बड़ी चुनौती है। उनके मुताबिक दिमाग के आंतरिक वैद्युत-चुम्बकीय-रासायनिक प्रारूपों के रहस्य को जानना इस दिशा में बड़ी कामयाबी होगी।

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